धूमधाम से आयोजित किया गया। इस अवसर
पर विद्यालय प्रधानाचार्य श्री मनीष कुमार दुबे ने हनुमान जी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया। उसके उपरांत
विद्यालय के शिक्षक अंबरीष मणि त्रिपाठी ने कहा पवन पुत्र श्री हनुमान जी महाराज का चरित्र हम सभी के लिए अनुकरणीय है।हनुमान जी विद्या बुद्धि बल ज्ञान के दाता तथा उनके हृदय में भगवान श्री राम की भक्ति निरंतर बहती रहती है। ऐसे में हनुमान जी हमारे आदर्श हैं आज उन्हीं पवन पुत्र हनुमान जी का प्राकट्य उत्सव है।हनुमान जी जब लंका
विध्वंस के पश्चात प्रभु श्री राम के पास वापस आते हैं तब प्रभु श्री राम उनसे पूछते हैं कि हे पवन पुत्र! आपने लंका का दहन किस प्रकार किया जरा कुछ बताइए। हनुमान जी बड़े ही विनम्र भाव से कहते है,कि हे नाथ! विशाल लंका नगरी को जलाने में मेरा कोई योगदान नहीं था, यह सब आपका प्रताप था जिसके कारण मैंने विशाल लंका को जला दिया। तात्पर्य है कि हम जीवन में छोटे से छोटा कार्य करते है। सबसे पहले अपना नाम लेते हैं। कि यह कार्य मेरे द्वारा संपादित किया गया परंतु
हनुमान जी हमें शिक्षा देते हैं की कार्य भले ही आपके द्वारा हुआ हो परंतु उसका श्रेय सबको मिलना चाहिए, ना कि स्वयं को क्योंकि हमारे किसी भी कार्य में समाज का योगदान होता है।अंत में उन्होंने हनुमान जी की वंदना के साथ अपनी वाणी को विराम दिया।
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं,
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं,
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि II
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री मनीष कुमार दुबे,श्री आशुतोष सिंह, श्री सितम आनंद, रविंद्र पांडे, रामनारायण राही, अजय कुमार, सीमा साहनी, संतोष कुमार, पवन कुमार, शैलेश कृष्ण त्रिपाठी, सत्य प्रकाश मिश्रा, मनीष कुमार अग्रहरी, दिलीप कुमार,जयहिंद कुमार, पारसनाथ यादव, सत्य प्रकाश शुक्ला, कुलदीप कुमार, संदीप कुमार, अदिति
कुमारी, संजय कुमार, सुमंत मणि पांडे, शक्ति कुमार, हरिकेश तिवारी, क्षितिज श्रीवास्तव, शेफाली शाही,संगीता कोरी, कशिश अग्रहरि, वशिष्ठ मुनि,वरुण कुमार, सुमन वर्मा,नागेंद्र दूबे,
पूजा सिंह, किरण तिवारी, अनुराधा सिंह,, जयप्रकाश मणि त्रिपाठी, अश्वनी कुमार, शिखा पांडे, अंबरीश मणि त्रिपाठी, संगीता गोंड,समीर श्रीवास्तव, रेनू बाला सहित सभी शिक्षक,विद्यार्थी तथा कर्मचारी उपस्थित रहे।
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